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बुधवार, 29 अक्टूबर 2025

"Le Voyageur Imprudent" उपन्यास कि काहानी

द्वितीय विश्व युद्ध के समय फ्रांस के एक छोटे शहर में पियरे नामक एक युवक रहता था। पियरे बहुत चतुर और जिज्ञासु था। वह हमेशा विज्ञान और अज्ञात रहस्यों के बारे में सोचता रहता था। उसका एक वैज्ञानिक साथी था, डॉक्टर मैथ्यू। मैथ्यू एक अज्ञात शोध में लगा हुआ था, जो समय यात्रा का एक मशीन तैयार करने का था। मैथ्यू ने एक अज्ञात रसायन की खोज की थी, जो मनुष्य को समय में आगे-पीछे यात्रा करा सकता था। इस रसायन का नाम था "नोएलिट"।

पियरे मैथ्यू के साथ उनके लेबोरेटरी में काम करता था। मैथ्यू ने उसे नोएलिट के बारे में बताया। यह एक ऐसा पदार्थ था, जिसे शरीर में इंजेक्ट करने पर मनुष्य समय में यात्रा कर सकता था। लेकिन यह अत्यंत खतरनाक था, क्योंकि इसके प्रभाव कितने समय तक रहेंगे या यह कैसे काम करेगा, यह पूरी तरह से ज्ञात नहीं था। पियरे इस आविष्कार से विशेष रूप से उत्साहित हो गया। उसने सोचा, "अगर मैं अतीत में जा सकूं, तो मैं इतिहास को अपनी आंखों से देख सकूंगा।"

लेकिन मैथ्यू ने पियरे को चेतावनी दी, "पियरे, समय यात्रा कोई खेल नहीं है। अतीत में कुछ बदल दिया तो भविष्य पूरी तरह बदल सकता है।" लेकिन पियरे की जिज्ञासा उसे रोक नहीं सकी। उसने नोएलिट का उपयोग करके अतीत में जाने का निश्चय कर लिया।

पियरे ने नोएलिट का एक छोटा डोज लिया और मन ही मन एक समय सोचा—18वीं शताब्दी, जब फ्रांसीसी क्रांति शुरू ही होने वाली थी। वह खुद को एक पुराने शहर में पा गया, जहां लोग अज्ञात वस्त्र पहने घोड़ागाड़ियों में आ-जा रहे थे। पियरे बहुत आश्चर्यचकित हुआ। उसने चारों ओर देखा और लोगों से बात करने की कोशिश की। लेकिन थोड़े ही समय में उसे समझ आ गया कि उसकी आधुनिक बातें और वस्त्र लोगों को अजीब लग रहे हैं।

वह एक छोटे गांव में पहुंचा, जहां उसे एक युवक से मुलाकात हुई, जिसका नाम था जीन। जीन उसके पूर्वज थे—यानी पियरे के परदादा। जीन एक साधारण किसान था, लेकिन बहुत उदार। पियरे ने जीन के साथ कुछ समय बिताया और उसके जीवन के बारे में जाना। जीन ने उसे बताया कि वह एक महिला से विवाह करना चाहता है, लेकिन गांव का जमींदार कई असुविधाएं पैदा कर रहा है।

पियरे ने सोचा, "अगर मैं जीन की सहायता करूं, तो मेरे परिवार का भाग्य बदल सकता है।" उसने जमींदार के विरुद्ध जीन की सहायता करने का निश्चय किया। लेकिन इस सहायता के लिए उसने एक खतरनाक योजना बनाई। उसने जमींदार के घर में चोरी करने की योजना बनाई, जो जीन को आर्थिक सहायता दे सकती थी।

पियरे की योजना सफल हुई, लेकिन इसका परिणाम भयानक हुआ। जमींदार के घर में चोरी होने के बाद गांव में एक बड़ा विवाद हो गया। अंत में जीन पर शक गया और उसे पकड़कर सजा दे दी गई। पियरे समझ गया कि उसके हस्तक्षेप ने जीन के जीवन को और खराब कर दिया। उसने मन ही मन सोचा, "मैंने अतीत को बदलने की कोशिश की, लेकिन इससे और बुरा हो गया।"

पियरे ने एक और नोएलिट डोज लिया और फिर अतीत में यात्रा की, जहां वह जीन को बचाने की कोशिश करे। इस बार वह और पीछे चला गया—17वीं शताब्दी। यहां उसे जीन के पूर्वज से मुलाकात हुई, जिसका नाम था फ्रांस्वा। फ्रांस्वा जीन के पिता थे। पियरे ने सोचा, "अगर मैं फ्रांस्वा को कुछ कर दूं, तो जीन का जन्म ही न होगा, और उसके कारण होने वाली समस्याएं भी मिट जाएंगी।"

पियरे ने एक खतरनाक निश्चय लिया। उसने फ्रांस्वा को मारने की योजना बनाई, जो जीन के जन्म को रोक देगी। लेकिन जब वह फ्रांस्वा को मारने की कोशिश करने लगा, तो उसके मन में एक अज्ञात भय जागा। उसने सोचा, "अगर मैं फ्रांस्वा को मार दूंगा, तो जीन का जन्म नहीं होगा। जीन का जन्म न होने पर मेरे परिवार का कोई जन्म नहीं होगा। और मैं खुद भी जन्म न लूंगा। तो मैं यहां कैसे आया?"

यह चिंता उसके मन को उलझा देती। वह समझ गया कि अतीत में कुछ बदलने से एक अज्ञात चक्र बन जाता है, जो उसके अपने अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न लगा देता है। इसे ग्रैंडफादर पैराडॉक्स कहा जाता है। पियरे अंत में फ्रांस्वा को मारना बंद कर दिया, क्योंकि वह इसके परिणाम से डर गया।

अतीत में बहुत असुविधाएं देखकर पियरे ने निश्चय किया कि वह भविष्य में जाए। उसने नोएलिट का एक और डोज लिया और 3000 ईस्वी में यात्रा की। भविष्य में उसने एक अज्ञात दुनिया देखी, जहां मनुष्य आकाश में उड़ रहे थे, रोबोट सभी काम कर रहे थे और पृथ्वी एक अज्ञात रूप ले चुकी थी। लेकिन इस दुनिया में मनुष्य बहुत एकाकी थे तथा यंत्रों पर पूरी तरह निर्भर थे।

पियरे को एक वैज्ञानिक से मुलाकात हुई, जिसने उसे बताया कि नोएलिट एक खतरनाक आविष्कार था, जो कई समयों में असंगति पैदा कर चुका था। उसने पियरे को चेतावनी दी कि वह जिस समय में है, वह उसके मूल टाइमलाइन का नहीं है। पियरे के अतीत में किए गए परिवर्तन ने एक नया टाइमलाइन बना दिया है।

पियरे समझ गया कि उसने अतीत और भविष्य में कई गलतियां की हैं। वह अपने मूल समय में लौटने की कोशिश करने लगा, लेकिन नोएलिट का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो रहा था। उसने डॉक्टर मैथ्यू से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसका मूल टाइमलाइन बदल चुका था।

अंत में, पियरे ने एक कठिन निश्चय लिया। उसने नोएलिट का उपयोग बंद कर एक नया जीवन शुरू किया। वह समझ गया कि समय एक जटिल नियम से चलता है, जिसे बदलना मनुष्य के हाथ में नहीं है।

फ्रांसीसी लेखक रेने बार्जावेल ने 1943 में अपनी उपन्यास "ले वॉयाजर इम्प्रूडां" (द इम्प्रूडेंट ट्रैवलर) में यह संक्षिप्त कहानी प्रस्तुत की है। इस उपन्यास का एक टेलीविजन आधारित रूपांतरण (टेलेफिल्म) 1982 ईस्वी में फ्रांस में निर्मित हुआ था तथा पहली बार 1982 में टेलीविजन पर प्रसारित हुआ था।
1982 के टेलीविजन फिल्म (टेलेफिल्म) "ले वॉयाजर इम्प्रूडां" में कहानी को थोड़ा परिवर्तित किया गया था तथा पियरे को द्वितीय विश्वयुद्ध के समय के एक सैनिक के रूप में दर्शाया गया था। यह उपन्यास से एक भिन्न रूपांतरण था, जिसमें कहानी को समसामयिक बनाने के लिए यह परिवर्तन किया गया था। तब ले वॉयाजर इम्प्रूडां उपन्यास की कहानी ग्रैंडफादर पैराडॉक्स संबंधी प्रश्न प्रस्तुत करती है।

ग्रैंडफादर पैराडॉक्स समय यात्रा (टाइम ट्रैवल) संबंधी एक दार्शनिक और वैज्ञानिक पैराडॉक्स (पैराडॉक्स) है। यह एक ऐसी स्थिति को समझाता है जिसमें एक व्यक्ति अतीत में यात्रा करके अपने दादा या नाना (ग्रैंडफादर) को मार देता है। यदि दादा/नाना मर जाते हैं, तो उस व्यक्ति के पिता या मां का जन्म नहीं होगा, और उनके जन्म न होने पर वह स्वयं भी जन्म नहीं लेगा। लेकिन यदि वह जन्म ही न हुआ हो, तो वह अतीत में जाकर दादा या नाना को कैसे मारेगा? यह एक तार्किक चक्र (लॉजिकल लूप) पैदा करता है, जो समय यात्रा की संभावना पर प्रश्न उठाता है।

ग्रैंडफादर पैराडॉक्स सबसे पहले 1931 ईस्वी में नेथनियल शैक्नर नामक एक विज्ञान काल्पनिक लेखक द्वारा अपनी एक काल्पनिक कहानी में प्रस्तुत किया गया था। बाद में रेने बार्जावेल नामक एक फ्रांसीसी लेखक ने 1943 में अपनी उपन्यास "ले वॉयाजर इम्प्रूडां" (द इम्प्रूडेंट ट्रैवलर) में इस पैराडॉक्स को और स्पष्ट रूप से वर्णन किया था। उपर्युक्त कहानी "ले वॉयाजर इम्प्रूडां" की मुख्य कथावस्तु है।

बाद में वैज्ञानिकों और दार्शनिकों के बीच ग्रैंडफादर पैराडॉक्स एक लोकप्रिय चर्चा का विषय बन गया है।
ग्रैंडफादर पैराडॉक्स के संबंध में दोनों पक्षों के समर्थक और विपक्षी मत हैं। समर्थक कहते हैं कि अतीत में कुछ बदलने से भविष्य में एक असंगति या इनकंसिस्टेंसी पैदा हो जाती है। जैसे, दादा या नाना को मारने से यात्री स्वयं अस्तित्व में रह ही नहीं पाता, जो एक तार्किक असंभवता है। यदि समय एक सरल रेखा में चलता है, तो अतीत में कुछ बदलने से वह पूरे भविष्य को बदल देता है तथा यह पैराडॉक्स पैदा करता है। कुछ वैज्ञानिक कहते हैं कि यह पैराडॉक्स दर्शाता है कि अतीत में यात्रा करना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से असंभव है, क्योंकि यह कारण-कार्य नियम या लॉ ऑफ कॉजैलिटी को तोड़ देता है।

अवश्य ही कुछ वैज्ञानिक और दार्शनिक कहते हैं कि अतीत में कुछ बदलने से एक नया समानांतर विश्व या पैरेलल यूनिवर्स पैदा हो जाता है। अर्थात, दादा या नाना को मारने से एक नया टाइमलाइन तैयार हो जाता है, लेकिन मूल टाइमलाइन अपरिवर्तित रहता है। यह पैराडॉक्स को निष्क्रिय कर देता है।

नोविकोव की आत्मसंगति सिद्धांत या नोविकोव्स सेल्फ-कंसिस्टेंसी प्रिंसिपल प्रस्तुत करके रूसी भौतिक वैज्ञानिक इगोर नोविकोव ने प्रस्ताव दिया था कि अतीत में कोई ऐसी घटना घटित नहीं हो सकती जो भविष्य को असंगत बना दे। अर्थात, यदि आप अतीत में जाते हैं, तो आप अपने दादा या नाना को मार ही नहीं पाएंगे, क्योंकि समय के नियम इसे रोक देंगे। कुछ वैज्ञानिक कहते हैं कि क्वांटम मैकेनिक्स के अनुसार समय यात्रा एक अनिश्चित फल (प्रोबेबिलिस्टिक आउटकम) दे सकती है, जिसमें पैराडॉक्स पैदा नहीं होता।

ग्रैंडफादर पैराडॉक्स और समय यात्रा आधारित कई फिल्म निर्मित हो चुके हैं।
समय यात्रा संबंधी सबसे प्रसिद्ध फिल्म है बैक टू द फ्यूचर (1985) तथा इसके तीन भाग रिलीज हो चुके थे। कई फिल्म और वेबसीरीज इस फिल्म की कहानी से प्रभावित होकर बाद में निर्मित हो चुके हैं। इस फिल्म में मार्टी मैकफ्लाई अतीत में जाकर अपने माता-पिता के विवाह को बाधा देने की आशंका पैदा करता है, जो उसके अपने अस्तित्व को खतरे में डाल देता है। यह पैराडॉक्स का एक लोकप्रिय उदाहरण है।
इसी प्रकार समय यात्रा संबंधी द टर्मिनेटर (1984) फिल्म में एक रोबोट अतीत में जाकर जॉन कोनर की मां को मारने की कोशिश करता है, जो जॉन के जन्म को रोक देगा। यह भी पैराडॉक्स का एक रूप है। लूपर (2012) फिल्म में समय यात्रा माध्यम से अपने भविष्य के संस्करण को मारने की कोशिश दिखाई जाती है, जो पैराडॉक्स का एक भिन्न रूप प्रस्तुत करता है। प्रीडेस्टिनेशन (2014) फिल्म समय यात्रा का एक जटिल चक्र दिखाता है जिसमें पैराडॉक्स का समाधान एक आत्मसंगति चक्र (सेल्फ-कंसिस्टेंट लूप) माध्यम से होता है। मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स के एवेंजर्स: एंडगेम (2019) फिल्म में समय यात्रा को समानांतर विश्व तत्व आधार पर व्याख्या किया गया है जिसमें अतीत में परिवर्तन नया टाइमलाइन पैदा करता है।

ग्रैंडफादर पैराडॉक्स समय यात्रा का एक महत्वपूर्ण दार्शनिक और वैज्ञानिक प्रश्न है। यह कारण-कार्य नियम, समय की प्रकृति और अस्तित्व पर चर्चा करने को आमंत्रित करता है। समर्थक इसे समय यात्रा की असंभवता का प्रमाण मानते हैं और विपक्षी समानांतर विश्व या आत्मसंगति तत्व माध्यम से इसके समाधान को संभव बताते हैं। यह पैराडॉक्स विज्ञान और काल्पनिक गल्पों में कई आकर्षक फिल्म और चर्चाओं को जन्म दे चुका है।

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