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शनिवार, 25 अक्टूबर 2025

आचरण कि पहचान

एक बार एक राजा के पास दूर-दूर से लोग नौकरी के लिए आते थे। एक सुबह राजदरबार में एक अनजान व्यक्ति आया, सिर झुकाकर बोला,  
"महाराज ! मैं आपकी सेवा में काम करना चाहता हूँ।"  

राजा ने मुस्कुराकर पूछा, "तुम्हारी विशेष योग्यता क्या है?"  

वह शांत स्वर में बोला, "मैं किसी का चेहरा देखकर बता सकता हूँ कि वह इंसान है या पशु।"  

राजा ठिठक गए और उत्सुक होकर उसे अपने सबसे प्रिय घोड़े की देखभाल का जिम्मा सौंपा।  

कुछ दिन बाद राजा ने पूछा, "मेरे सबसे कीमती घोड़े के बारे में क्या राय है?"  

वह बोला, "महाराज ! घोड़ा दिखने में सुंदर है, पर यह अपनी नस्ल का नहीं है।"  

राजा हैरान हुए और अनुभवी घुड़सवार को बुलाकर पूछा। घुड़सवार ने बताया, "घोड़ा अपनी नस्ल का ही है, पर जन्म के बाद इसकी माँ मर गई थी। इसे गाय के दूध पर पाला गया।"  

राजा ने उस व्यक्ति से पूछा, "तुमने यह कैसे जाना?"  

वह बोला, "महाराज ! यह घोड़ा घास खाते समय गाय की तरह सिर नीचे करता है, जबकि असली घोड़े घास मुँह में लेकर सिर ऊपर करके खाते हैं।"  

राजा उसकी बुद्धिमानी से प्रभावित होकर उसे अनाज, घी, बकरी, मुर्गियाँ आदि पुरस्कार दिए और उसे रानी के महल की जिम्मेदारी सौंपी।  

कुछ दिन बाद राजा ने पूछा, "रानी के महल के बारे में क्या राय है?"  

वह शांत स्वर में बोला, "रानी बहुत शालीन हैं, उनका व्यवहार राजसी है, पर वे जन्म से रानी नहीं हैं।"  

राजा हैरान हुए और रानी की माँ को बुलाकर पूछा। उन्होंने गंभीर स्वर में कहा, "हाँ, यह सच है। तुम्हारे जन्म से पहले हमने अपनी बेटी खो दी थी। इसलिए दूसरी कन्या को अपनी बेटी की तरह पाला।"  

राजा ने उस व्यक्ति से पूछा, "तुमने यह कैसे जाना?"  

वह बोला, "महाराज ! असली राजकन्याएँ अपनी दासियों से सम्मान और सौजन्य से बात करती हैं। पर आपकी रानी दासियों को आदेश मानने वाली मशीन की तरह व्यवहार करती हैं।"  

राजा फिर प्रभावित हुए और उसे अनाज, घी, भेड़, बकरी आदि पुरस्कार दिए, साथ ही दरबार में स्थायी नियुक्ति दी।  

कुछ महीने बाद राजा ने हँसते हुए कहा, "तुमने सबको परख लिया, अब मेरे बारे में बताओ।"  

वह चुप रहा, फिर बोला, "महाराज ! यदि आप वचन दें कि मुझे मृत्युदंड नहीं देंगे, तो बताऊँगा।"  

राजा ने गंभीरता से कहा, "मैं वचन देता हूँ।"  

वह सिर झुकाकर बोला, "आप राजपरिवार के संतान नहीं हैं, और आपके व्यवहार में भी राजसी रक्त नहीं है।"  

राजा का चेहरा गुस्से से लाल हो गया, पर वचन याद आया। वे अपनी माँ के पास गए और पूछा।  

रानी माँ ने गहरी साँस लेकर कहा, "हाँ, यह सच है। हम निःसंतान थे, इसलिए एक पशुपालक के बच्चे को गोद लेकर तुम्हें पाला।"  

राजा ने उस व्यक्ति से पूछा, "तुमने यह कैसे जाना?"  

वह हल्के से मुस्कुराकर बोला, "महाराज ! राजा पुरस्कार में सोना, हीरा, नीलम, मोती देते हैं। पर आप जो पुरस्कार देते हैं—अनाज, घी, बकरी, भेड़—ये पशुपालक का स्वभाव है।"  

थोड़ा रुककर उसने कहा, "महाराज ! इंसान की असली पहचान उसका चेहरा नहीं, उसका व्यवहार है। पद, प्रतिष्ठा या धन कितना भी हो, इंसान को इंसान उसका व्यवहार बनाता है।"


क्या पहले के लोग आजके लोगों से ज्यादा विद्वान हुआ करते थे ?

प्राचीन ग्रीक सभ्यता के समय, लगभग 2300 वर्ष पूर्व, अलेक्जेंड्रिया (वर्तमान मिस्र) में एराटोस्थेनीज़ नामक एक गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे। उन्होंने एक पुस्तक में पढ़ा कि सायनी (वर्तमान लीबिया में स्थित) नामक शहर में 21 जून को दोपहर 12 बजे, यदि एक लकड़ी का खंभा सीधा जमीन में गाड़ा जाए, तो उसकी छाया नहीं पड़ती। अर्थात्, उस दिन सूर्य सायनी में ठीक सिर के ऊपर (या जेनिथ पर) होता है।
इस तथ्य की सत्यता जानने के लिए एराटोस्थेनीज़ ने एक प्रयोग किया। 21 जून को दोपहर 12 बजे उन्होंने अलेक्जेंड्रिया में एक सीधा लकड़ी का खंभा जमीन में गाड़ा और देखा कि उसकी छाया पड़ रही थी। इसका कारण था कि अलेक्जेंड्रिया में उस दिन सूर्य ठीक सिर के ऊपर नहीं था। इस अवलोकन से उन्होंने समझा कि पृथ्वी समतल नहीं, बल्कि गोलाकार है, क्योंकि एक समतल सतह पर एक ही समय में एक स्थान पर छाया न पड़ना और दूसरे स्थान पर छाया पड़ना असंभव है।

इसके बाद, उन्होंने नाविकों की सहायता से अलेक्जेंड्रिया और सायनी के बीच की दूरी मापी, जो लगभग 5,000 स्टेडिया थी। एक स्टेडियम लगभग 157.5 मीटर होता है, अर्थात् कुल दूरी आधुनिक इकाई में लगभग 800 किलोमीटर थी। अलेक्जेंड्रिया में छाया का कोण 7.2 डिग्री था, जबकि सायनी में सूर्य सिर के ऊपर होने के कारण कोण 0 डिग्री था।

एराटोस्थेनीज़ ने गणना की: यदि 7.2 डिग्री एक इकाई है, तो 360 डिग्री के एक वृत्त में 50 इकाइयाँ (360 ÷ 7.2) होंगी। यदि एक इकाई की दूरी 5,000 स्टेडिया है, तो पृथ्वी की परिधि 5,000 × 50 = 2,50,000 स्टेडिया होगी, जो आधुनिक इकाई में लगभग 40,000 किलोमीटर है। यह आधुनिक माप के साथ अत्यंत समान है। यह गणना उनकी गणितीय और अवलोकन क्षमता को प्रमाणित करती है। इसलिए, पृथ्वी की परिधि को सबसे पहले मापने का श्रेय प्राचीन ग्रीक गणितज्ञ और खगोलशास्त्री एराटोस्थेनीज़ को दिया जाता है। आधुनिक माप में पृथ्वी की परिधि 40,075 किमी है, और एराटोस्थेनीज़ की गणना इसके अत्यंत निकट थी। यह उनके समय में एक असाधारण उपलब्धि थी।

लगभग 800 वर्ष बाद, भारतीय खगोलशास्त्री आर्यभट्ट ने अपने ग्रंथ आर्यभटीयम में पृथ्वी को एक गोलाकार वस्तु के रूप में वर्णित किया और इसके गति तथा अन्य ग्रहों के साथ संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने पृथ्वी की परिधि की गणना की, जो लगभग 39,968 किलोमीटर थी। यह आधुनिक माप (40,075 किमी) के बहुत निकट थी। शोधकर्ताओं का मानना है कि आर्यभट्ट की गणना स्वतंत्र थी और ग्रीक गणना से प्रभावित नहीं थी।

निश्चित रूप से, एराटोस्थेनीज़ और आर्यभट्ट अपने समय के श्रेष्ठ शोधकर्ता थे, लेकिन मैं देखता हूँ कि आजकल कुछ अति विद्वान लोग उनके और उनके कार्यों का उदाहरण देकर यह मत रखते हैं कि वर्तमान पीढ़ी की तुलना में उस समय के लोग अधिक बुद्धिमान और विद्वान थे। लेकिन यह पूर्णतः सत्य नहीं है।

आज की युवा पीढ़ी की बुद्धिमत्ता और योग्यता की तुलना पूर्व पीढ़ियों से करने पर यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक काल के लोग कई क्षेत्रों में समान या अधिक दक्ष हैं।

फ्लिन प्रभाव (Flynn Effect) इसका समर्थन करता है। न्यूजीलैंड के मनोवैज्ञानिक जेम्स फ्लिन के शोध के अनुसार, 20वीं शताब्दी में औसत मानव IQ में प्रत्येक दशक में लगभग 3 अंक की वृद्धि हुई है। इसके कई कारण हैं। आधुनिक शिक्षा प्रणाली अधिक विस्तृत और सुलभ हो गई है, जिसने युवा पीढ़ी को जटिल समस्याओं के समाधान में दक्ष बनाया है। बेहतर स्वास्थ्य और पोषण ने मानव मस्तिष्क के विकास में सहायता की है। इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों ने युवा पीढ़ी को ज्ञान तक व्यापक पहुँच प्रदान की है, जिससे उनकी बौद्धिक क्षमता बढ़ी है। यह प्रभाव दर्शाता है कि आज की पीढ़ी का औसत IQ पूर्व पीढ़ियों से अधिक है। आज की युवा पीढ़ी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कोडिंग, डेटा विश्लेषण, और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में अग्रणी है। उदाहरण के लिए, इसरो के चंद्रयान और नासा के मंगल मिशन में युवा वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पूर्व पीढ़ी प्राकृतिक अवलोकन और सरल गणित पर निर्भर थी, जबकि आज की युवा पीढ़ी जटिल एल्गोरिदम और सुपरकंप्यूटर का उपयोग कर अधिक सटीक और तेज गणना करती है।

इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण आज की युवा पीढ़ी के पास विज्ञान, इतिहास, और खगोलविज्ञान से संबंधित सूचनाओं का अपार भंडार है। सोशल मीडिया के माध्यम से युवा पीढ़ी विज्ञान और खगोलविज्ञान से संबंधित चर्चाओं में भाग ले रही है, जो पूर्व पीढ़ी के लिए असंभव था। पूर्व पीढ़ी कृषि, पंचांग, और प्राकृतिक चक्रों से संबंधित समस्याओं का समाधान करती थी। आज की पीढ़ी जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, और वैश्वीकरण जैसी जटिल समस्याओं का समाधान कर रही है। आधुनिक मनुष्य नवीकरणीय ऊर्जा, बायोटेक्नोलॉजी, और अंतरिक्ष अन्वेषण में नए आविष्कार कर रहे हैं, जो पूर्व पीढ़ियों के समय में अकल्पनीय था। आज के लोग सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण, और वैश्विक समस्याओं के प्रति अधिक जागरूक हैं। वे वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग कर रहे हैं, जो पूर्व पीढ़ी के स्थानीय दृष्टिकोण से भिन्न है।

पूर्व पीढ़ी के मनीषियों ने अपने समय में असाधारण कार्य किए, लेकिन आज की पीढ़ी भी अपने समय की चुनौतियों के अनुसार समान या अधिक दक्षता प्रदर्शित कर रही है। फ्लिन प्रभाव और अन्य वैज्ञानिक शोध दर्शाते हैं कि आज की पीढ़ी का IQ और बौद्धिक क्षमता पूर्व पीढ़ियों से कम नहीं है। वे नई प्रौद्योगिकी, ज्ञान की सुलभता, और वैश्विक सहयोग के माध्यम से कई क्षेत्रों में प्रगति कर रहे हैं। प्राचीन काल में यदि एराटोस्थेनीज़ और आर्यभट्ट थे, तो आधुनिक युग में भी अल्बर्ट आइंस्टीन, वर्नर हाइजेनबर्ग, स्टीफन हॉकिंग, एडवर्ड विटेन, लिसा रैंडल, जेनिफर डाउडना, डेमिस हसाबिस, रोजर पेनरोज, और ग्रेगरी पर्लमैन जैसे अनगिनत विद्वान प्रत्येक क्षेत्र में हुए हैं ।

डेमोक्रिटस, एराटोस्थेनीज़, या आर्यभट्ट के समय में सभी लोग विद्वान नहीं थे, और न ही इस युग में सभी लोग विद्वान हैं। चार अंगुलियाँ कभी समान नहीं होतीं। इसलिए, आज की पीढ़ी को “कम बुद्धिमान” या “अक्षम” कहना अनुचित और आधारहीन है।

वर्तमान पीढ़ी को पूर्व पीढ़ियों से कम बुद्धिमान मानने का दावा मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से कुछ पक्षपातों (biases) और भ्रांत धारणाओं से उत्पन्न होता है। कुछ लोग नॉस्टैल्जिया बायस के कारण अतीत को आदर्श मानते हैं और वर्तमान को कमतर चित्रित करते हैं। ऐसे लोग अतीत की सफलताओं को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करते हैं और वर्तमान की जटिलताओं और प्रगति को अनदेखा करते हैं। इसके साथ ही, “पतनवाद” (declinism) नामक एक मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति भी कुछ लोगों के मन को प्रभावित करती है। पतनवाद से प्रभावित लोग मानते हैं कि समय के साथ समाज या बुद्धिमत्ता में ह्रास हो रहा है। यह दृष्टिकोण अक्सर अपर्याप्त तथ्यों या भ्रांत धारणाओं पर आधारित होता है।

इसके अतिरिक्त, अतिसाधारणीकरण (overgeneralization) और “रूढ़िबद्धता” (stereotyping) जैसे संज्ञानात्मक पक्षपात (cognitive biases) भी इस दावे में परिलक्षित होते हैं। एक संपूर्ण पीढ़ी को बिना प्रमाण के नकारात्मक रूप से चित्रित करना एक सरलीकृत और गलत निष्कर्ष है। 

इसके अलावा, इसे “प्रसंगबद्धता” (framing) के रूप में भी देखा जा सकता है, जहाँ सूचना को एक विशिष्ट दृष्टिकोण से प्रस्तुत कर पाठकों के मन में नकारात्मक भावना जगाई जाती है। यह अक्सर भावनात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न करने या प्रेरणा देने के लिए किया जा सकता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, IQ एक जटिल मापक है जो पर्यावरण, शिक्षा, और सामाजिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। फ्लिन प्रभाव दर्शाता है कि आधुनिक युग में औसत IQ में वृद्धि हुई है, जो बेहतर शिक्षा, पोषण, और प्रौद्योगिकी की सुलभता के कारण संभव हुआ है। इसलिए, वर्तमान पीढ़ी को कम बुद्धिमान मानना मिथ्यासूचना पक्षपात (misinformation bias) का एक उदाहरण है, जो तथ्यात्मक रूप से गलत और मनोवैज्ञानिक पक्षपातों से उत्पन्न है।

संक्षेप में, वर्तमान पीढ़ी की बौद्धिक क्षमता को कम आंकना एक अनुचित और भ्रांत धारणा है, जो मनोविज्ञान में नॉस्टैल्जिया, पतनवाद, और रूढ़िबद्धता जैसे पक्षपातों से प्रभावित है। आज की युवा पीढ़ी अपने समय की चुनौतियों का सामना अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और वैश्विक ज्ञान की सहायता से कर रही है। यह पीढ़ी अतीत की सफलताओं का सम्मान करते हुए अपनी स्वतंत्र योगदान को प्रमाणित कर रही है।