मेँ अपने मन का दास कलम का कर्मचारी हुँ जो मन मेँ आया लिखदिया । कोई पागल कहे तो मुझे क्या ? कहता है तो कहने दो ।।
ब्लॉग आर्काइव
शनिवार, 3 मई 2014
मोदी निकला धोकेवाज !
चापलुस हमेँ क्षमा करेँ की हम उनके बारे मेँ गलत टिप्पणी करनेवाले है । पेट्रोल को लेकर उनका आकलन गलत था । पेट्रोल का किमत युवाओँ को सता रहा था की चुगलखोरोँ ने यह प्रचार किया पेट्रोल के किमत केवल भारत मेँ ही बढ़ाहुआ है सच्चाई इसके विपरित दिखा जब हमनेँ दुसरे देशोँ के लोगोँ संपर्क किया । पाक मेँ 115 ,नेपाल मेँ 132 और इरान मेँ 99 पर लीटर । एकवार तो ये लोग ओबाम तक को मोदी के प्रसंसक बनादिया था । शर्म की बात यह है ओड़िशा मेँ मोदी के जितने चापुलुस हे आज मुँ छुपाये घर मेँ बैठ गये है । ओड़िशा और ओड़िआओँ धोका मिलचुका हे अब देश की बारी ।(अनजान लोगोँ को बता दुँ की मोदी नेँ पोलाभरम प्रकल्प को पुरा करने का एलान किया जिसमेँ ओड़िशा तथा छतिशगड़ का 4190 square Hecter उपजाऊ जमीन पानी मेँ ड़ुब जायेगा जिसे ये लोग बंजर कह रहे हे ।) अगर आप ओड़िआ लोग यह सोच रहे की कोई राष्ट्रिय नेता आपके मंगल हेतु कार्य करेगा तो मन से यह धारण मिटा दिजीये ! इस देश नेँ अबतक ओड़िआओँ को दिया क्या ? जब बाढ़ और चक्रवात से हम मर रहे होते ये लोग मज्जे ले ले कर दिनबिता देते । 1999 मेँ जब विदेशोँ से साहयता राशी आया तब बिजेपी सरकार की नीँद टुटी दिया कितना 150 करोड़ ! इससे ज्यादा तो विदेशीओँ नेँ दिये । आज इनके बड़े बड़े नेता लंबे लंबे झाड़ रहे हे की हम सबकुछ उखाड़ देगेँ परंतु इनमेँ झाड़ उगाने मेँ भी दम नहीँ । ओडिआ बंगाली युपी बिहारी नेपाली और मराठी श्रमिकोँ के वजह से गुजरात आधुनिक काल मेँ श्रेष्ठ बताया जा रहे । 1500 सालतक चुहोँ की तरह छुपनेवाले गुजराती खुदको शेर कहते तो शर्म आता है । अरे भेँस चलानेवाले तुम पशुपालक मारत के उदार हिँदु धर्म के कारण अबतक जो कुछ बोल रहे हो । याद रहे 86लाख से भी ज्यादा ओड़िआ गुजरता राज्य मेँ हे । दंगा हो गया तो किस बिल मेँ छुपोगे चुहो ।
गुरुवार, 24 अप्रैल 2014
अनलिमिटेड कमेँट है पढपढ कर थक न जाओ
डरपोक नेताओँ से देश नहीँ चल सकता नेता हो तो ओटो भान बिसमार्क जैसा हो .......
वो नेता नहीँ जो सिर्फ वादे करते हैँ वो नेता हैँ जो कहे हुए को कर दिखाते है.....,,
वो भी मुजरीम हे जिन्होने गुनहगारोँ को भोट दिया है वो भी उतने जिम्मेदार जितने भ्रष्ट नेता है........
सेकुलार जितने हे उन्हे वोर्डर भेज दो कुछ घंटो मेँ वो सच्चाई जान जायेगेँ.......
पाकिस्तान को मिटाने के लिये शांति की नहीँ युद्ध करना होगा कलयुग मेँ शांति से मौत भी नहीँ मिलती.......
तु ही राम तु रावण है पहचान खुद को तु क्या बला है ........
भगवान बिना भाव के ना तो गाने से आयेगेँ ना रोने से उन्हे तुम्हारे प्रसाद फुल और नैवेद्य से कोई मतलब नहीँ हाँ अगर मन से बुलाओ तो दौडे चले आयेगेँ........
महापुरुष वो नहीँ है जिनके द्वारा अदभुत कर्मोँ का संपादन होता हो अपितु महापुरुष वो हे जिनके जीवन से हमेँ जीवन को जीनेँ की शिक्षा मिलाते होँ.......
व्यक्ति जबजब राष्ट्र से खुदको ज्यादा अहमियत देगा तबतब महामारत जैसे युद्ध होते रहेगेँ.....
अगर कोई तुम्हे झुकाना चाहता है और नीचा देखाने की कोशिश कर रहा हे तो समझ लो की वो अपने आत्मा के सामने कबका गिर चुका है और उसके मन मेँ कहीँ ना कहीँ अपराधवोध तो जरुर होगा .....
दिखावा करना हमारे रक्तगत गुणोँ मेँ से एक हे जैसे हमारे पूर्वज वंदर आज भी गुलाटी मार मार कर दुसरोँ के द्यान आकर्षण करते रहते है.......
हर वंदर आदरणीय है अगर वो हनुमान जैसा होगा .....
हनुमान नेँ जैसे लंका को आग लगाकर जला दिया था भगवान करे इस कंग्रेसी सरकार की वही हाल हो........
इन कंग्रेसीओँ को जिभ चलाना नहीँ आता तो देश क्या खाक चलायेगेँ.......
भारतदेश मेँ एक वंदर भी PM बनसकता है वशर्ते वो गांधी जी के वंदर ना हो.,,,,,,,
पीएम बनने के लिये हर कोई चाहता हे पर कृषक बनने और खेती करने के लिये कितने युवक कोशिश करते है ??????
युवक कोँ भोट के लिये रिश्वत देने वाले हातोँ को काट कर फैँक देने चाहिये......
हात हे छिन लेने को ना की देनेँ को भोट देने से पहले याद कर लो ये तो है उन चोरोँ का हात....
वो नेता नहीँ जो सिर्फ वादे करते हैँ वो नेता हैँ जो कहे हुए को कर दिखाते है.....,,
वो भी मुजरीम हे जिन्होने गुनहगारोँ को भोट दिया है वो भी उतने जिम्मेदार जितने भ्रष्ट नेता है........
सेकुलार जितने हे उन्हे वोर्डर भेज दो कुछ घंटो मेँ वो सच्चाई जान जायेगेँ.......
पाकिस्तान को मिटाने के लिये शांति की नहीँ युद्ध करना होगा कलयुग मेँ शांति से मौत भी नहीँ मिलती.......
तु ही राम तु रावण है पहचान खुद को तु क्या बला है ........
भगवान बिना भाव के ना तो गाने से आयेगेँ ना रोने से उन्हे तुम्हारे प्रसाद फुल और नैवेद्य से कोई मतलब नहीँ हाँ अगर मन से बुलाओ तो दौडे चले आयेगेँ........
महापुरुष वो नहीँ है जिनके द्वारा अदभुत कर्मोँ का संपादन होता हो अपितु महापुरुष वो हे जिनके जीवन से हमेँ जीवन को जीनेँ की शिक्षा मिलाते होँ.......
व्यक्ति जबजब राष्ट्र से खुदको ज्यादा अहमियत देगा तबतब महामारत जैसे युद्ध होते रहेगेँ.....
अगर कोई तुम्हे झुकाना चाहता है और नीचा देखाने की कोशिश कर रहा हे तो समझ लो की वो अपने आत्मा के सामने कबका गिर चुका है और उसके मन मेँ कहीँ ना कहीँ अपराधवोध तो जरुर होगा .....
दिखावा करना हमारे रक्तगत गुणोँ मेँ से एक हे जैसे हमारे पूर्वज वंदर आज भी गुलाटी मार मार कर दुसरोँ के द्यान आकर्षण करते रहते है.......
हर वंदर आदरणीय है अगर वो हनुमान जैसा होगा .....
हनुमान नेँ जैसे लंका को आग लगाकर जला दिया था भगवान करे इस कंग्रेसी सरकार की वही हाल हो........
इन कंग्रेसीओँ को जिभ चलाना नहीँ आता तो देश क्या खाक चलायेगेँ.......
भारतदेश मेँ एक वंदर भी PM बनसकता है वशर्ते वो गांधी जी के वंदर ना हो.,,,,,,,
पीएम बनने के लिये हर कोई चाहता हे पर कृषक बनने और खेती करने के लिये कितने युवक कोशिश करते है ??????
युवक कोँ भोट के लिये रिश्वत देने वाले हातोँ को काट कर फैँक देने चाहिये......
हात हे छिन लेने को ना की देनेँ को भोट देने से पहले याद कर लो ये तो है उन चोरोँ का हात....
बुधवार, 23 अप्रैल 2014
मेरा पहला दोस्त किताब था
आज विश्व पुस्तक दिवस पर मेरे इस पुराने दोस्त को याद कर रहा हुँ । बचपन मेँ जब कहीँ मुझे किताब मिलजाते मेँ उनका हाल किसी शत्रृ के भांती करता था । फिर किताबोँ से मुझे कोई खास लगाव न थे पर स्कुल मेँ आते ही मेँ किताबोँ की एहमियत समझने लगा । फिर थोड़ा बड़ा होनेपर काहानी पढ़ने के शौख जगा, उनदिनोँ ओडिआ भाषा मेँ मीनावजार के नाम से एक पत्रिका आया करता था जो आज भी प्रकाशित होता हे । इस पत्रिका मेँ खास त्वौर पर बच्चोँ के लिये लेख छपते हे और मैनेँ लगातार 6 साल मनीअर्डर से इस किताब को मंगबाया था । चंदामामा के नाम से एक और पत्रिका भी उनदिनोँ काफी मशहुर हुआ था जो आज भी चेन्नेई से 16 भाषाओँ मेँ प्रकाशित होता हे । चंदामामा इतना फैमस था की किताबोँ के दुकान मेँ जैसे ही नया अंक आया की खाली हो जाया करता था । हाईस्कुल के दिनोँ मेँ एक सहपाठी अश्विन से मांग मांग कर चंदामामा पढ़ा करता था और कईबार तो हम लोग क्लास मेँ चुपचुपके पढ़करते थे । ऐसा नहीँ की मेँ सिर्फ किताब पढ़ता था परंतु किताब मेरा पहला दोस्त था जिसके कारण मेरे दिन कट जाता था । आज जब मेँ यह लेख लिख रहा हुँ मुझे हमारे अपर प्राईमेरी टिचर श्री अमर मल्लिक याद आ रहे हैँ जिनके कारण कुछ दिन के लिये ही सही पर हमारे स्कुल मेँ लाईब्रेरी किताब मिलने लगा था । 2 साल बाद एक संस्था नेँ लोगोँ को जागरुक बनाने के लिये किताबोँ का अस्थायी लाईब्रेरी खोला । हमारे गांव मेँ आदि पंडा जी के यहाँ उनकी बहन इस संस्था कि और से इसे संचालन कर रही थीँ । तब मेँ और बहन शाम होते ही वहाँ चुपके से जाते थे और पुराने किताब लौटाकर नया किताब ले आते थे । एक दिन पिताजी ने हमेँ रंगेहातो पकड़ा और हमेँ उसदिन बहुत मार पड़ी थी । माईनर मेँ आते आते मेँ पढ़ाई कि और ज्यादा ध्यान देनेलगा पर काहानी पढ़ने का नशा अब भी बरकरार था । माईनर मेँ लाईब्रेरी किताब मिलते थे और वहाँ से लिया गया यादगार किताब था "ट्रोजान अश्व" इसमेँ ट्रय युद्ध के बारे मेँ लिखा गया हे । जवानीँ मेँ कदम रखते रखते अब मुझे कविता आकर्षित लगने लगे फिर फिल्मी गानोँ का शौख चढ़ा तो किताब पढ़ने के लिये वक्त नहीँ मिल पाता था । आज इंटरनेट के कारण जब भी मन करता हे Ebook पढ़लेता हुँ पर पहले जैसा मजा नहीँ आता क्युँ किताब तो आखीरकार किताब हे ना...
मंगलवार, 22 अप्रैल 2014
सुरत........कर्मवादीओँ का सहर
.........भाग- 1........
सुरत मेरे लिये अबतक अनलॉकी रहा हे पर मुझे ये सहर अछा लगता हे । सुरत के लिये कहा जाता हे की यहाँ आप बिना पैसा और योग्यता के आ जाय तो भी आप को काम मिलजायेगा और यही कारण हे की पिछले 20 वर्षोँ मेँ सहर की आबादी काफी बढ़चुका हे । 2011 जनगणना के अनुसार सहर मेँ 44 लाख लोग रहते हे जिनके पास पहचान पत्र हे परंतु सुरत मेँ ऐसे लोगोँ की तादात ज्यादा हे जिनके पास कोई पहचान पत्र नहीँ है । ये लोग दुसरे राज्योँ से आये मजदुर हे जो सहर के कपड़े उद्योग मेँ ज्यादातर काम करते मिलेगेँ । सुरत के बारे मेँ आपने पढ़ा होगा या किसी से सुना होगा परंतु मैनेँ इस सहर को करीब से देखा और समझा हे । आज से 15 साल पहले यह सहर दुसरे सहरोँ से काफी पिछे था पर आज ये दुनिया मेँ छठा सबसे तेज विकाश करनेवाला सहर बनचुका है । सुरत को ग्रीन सीटी के नाम से भी जानाजाता है और यह सहर भारत का तिसरा सबसे स्वच्छ सहर हे । हालांकि यहाँ भी कुछ लोग गंदगी फैलाने के लिये सर्वसाधारण स्थलोँ के निकट पेशाव तथा थुक देते । सुरत नगर निगम के सक्रिय प्रयास से आज भारत मेँ सुरत दुसरे सहरोँ के लिये प्रेरणा रुप बना हे । सहर मेँ हर साल दो बार बृक्षरोपण किया जाता है और अबतक सहर मेँ 5000000 से भी ज्यादा वृक्ष लगाया जा चुका है । चालु वित्त वर्ष मेँ 2200 करोड़ सहरी विकाश के लिये भारत सरकार से मिला था जिसको सुरत नगर निगम नेँ 8 महिनोँ मेँ ही खत्म करदिया । हाल नगरनिगम नेँ सुरत मेँ 6 नये ऑवर व्रीज का निर्माण कार्य हात लिया हे जो लगभग 6 महिनोँ मेँ खत्म हो जायेगा । अवैध निर्माण रोकने मेँ भी सुरत नगर निगम दुसरे सहरोँ के मुकाबले काफी आगे हे । 8 वर्षोँ मेँ सहरी बिस्तार से करीबन 46 वस्ती को हटाकर उन्हे कोसाड़ गांव मेँ गुजरात सरकार नेँ नया घर दिया । आज भारत मेँ सुरत दुसरे सहरोँ से आगे इसलिये भी है की यहाँ हर व्यक्ति केवल कर्म पर यकिन रखता हे .......क्रमशः......
सुरत मेरे लिये अबतक अनलॉकी रहा हे पर मुझे ये सहर अछा लगता हे । सुरत के लिये कहा जाता हे की यहाँ आप बिना पैसा और योग्यता के आ जाय तो भी आप को काम मिलजायेगा और यही कारण हे की पिछले 20 वर्षोँ मेँ सहर की आबादी काफी बढ़चुका हे । 2011 जनगणना के अनुसार सहर मेँ 44 लाख लोग रहते हे जिनके पास पहचान पत्र हे परंतु सुरत मेँ ऐसे लोगोँ की तादात ज्यादा हे जिनके पास कोई पहचान पत्र नहीँ है । ये लोग दुसरे राज्योँ से आये मजदुर हे जो सहर के कपड़े उद्योग मेँ ज्यादातर काम करते मिलेगेँ । सुरत के बारे मेँ आपने पढ़ा होगा या किसी से सुना होगा परंतु मैनेँ इस सहर को करीब से देखा और समझा हे । आज से 15 साल पहले यह सहर दुसरे सहरोँ से काफी पिछे था पर आज ये दुनिया मेँ छठा सबसे तेज विकाश करनेवाला सहर बनचुका है । सुरत को ग्रीन सीटी के नाम से भी जानाजाता है और यह सहर भारत का तिसरा सबसे स्वच्छ सहर हे । हालांकि यहाँ भी कुछ लोग गंदगी फैलाने के लिये सर्वसाधारण स्थलोँ के निकट पेशाव तथा थुक देते । सुरत नगर निगम के सक्रिय प्रयास से आज भारत मेँ सुरत दुसरे सहरोँ के लिये प्रेरणा रुप बना हे । सहर मेँ हर साल दो बार बृक्षरोपण किया जाता है और अबतक सहर मेँ 5000000 से भी ज्यादा वृक्ष लगाया जा चुका है । चालु वित्त वर्ष मेँ 2200 करोड़ सहरी विकाश के लिये भारत सरकार से मिला था जिसको सुरत नगर निगम नेँ 8 महिनोँ मेँ ही खत्म करदिया । हाल नगरनिगम नेँ सुरत मेँ 6 नये ऑवर व्रीज का निर्माण कार्य हात लिया हे जो लगभग 6 महिनोँ मेँ खत्म हो जायेगा । अवैध निर्माण रोकने मेँ भी सुरत नगर निगम दुसरे सहरोँ के मुकाबले काफी आगे हे । 8 वर्षोँ मेँ सहरी बिस्तार से करीबन 46 वस्ती को हटाकर उन्हे कोसाड़ गांव मेँ गुजरात सरकार नेँ नया घर दिया । आज भारत मेँ सुरत दुसरे सहरोँ से आगे इसलिये भी है की यहाँ हर व्यक्ति केवल कर्म पर यकिन रखता हे .......क्रमशः......
गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014
अंधविश्वास हि धर्म को मार सकता हे.....
हमेँ उन मान्यताओँ को मानना चाहिये जो विज्ञान सम्मत हो जैसे देवी काम क्रोध मोह माश्चर्य और अहंकार का बलि चाहति हे और यह सब दुर्गुण आ जाने पर इंसान पशु बन जाता हे । लेकिन बाद मेँ लोगोँ नेँ श्लोक और धर्मवाक्योँ का गलत मतलब निकालकर स्वार्थ साधन मेँ लग गये जिससे पृथ्वी मेँ अधर्म बढ़गया और आज से करिबन 3600 साल पहले महाभारतकाल मेँ पृथ्वी 3 डिग्री उत्तर कि और ढ़लगया जिससे अरव और उत्तर अफ्रिका मेँ साहारा मरुस्तल बनगया ।(अरव मेँ पहले अरवी घोडे मिलते थे जो काफी मजवुत और ताकतवर होते थे....शोधकर्ताओँ को मध्यप्राच्य से कई जीवोँ के अवशेष मिलेँ जो साबित करता हे कि कभी अरव और साहारा मरुस्थल हराभरा था )
बाद मेँ अरव मेँ बचेहुए लोगोँ मेँ 1000 वर्षखंड मेँ अंधविश्वास इतना फैला कि लोग धीरे धीरे जोराष्टर धर्म (संभवत: यह धर्म राक्षसोँ का होगा क्युँ कि पुराने लेखोँ मेँ राक्षस वेद के वारे मेँ वताया गया हे और जोराष्टर धर्म ग्रथों मेँ ज्यादातर भुत प्रेत और राक्षसी विद्याओँ का वर्नन हे ...आगे चलकर इस धर्म से इहुदी और इस्लाम धर्म बना और इहुदी धर्म से ईसाई धर्म ) को छोडकर नये धर्म बनाने लगे
। अंधविश्वास हि धर्म को मार देता हे और आज जोराष्टर धर्म लुप्त हो गया हे और इससे प्ररित 3 नये धर्म आ गये । असल मेँ सारे धर्मोँ मेँ तत्व एक हे परंतु अलग अलगा भाषा , प्रांत और अलगाववाद के वजह से हमेँ वो दिखनहीँ पाता ।
बाद मेँ अरव मेँ बचेहुए लोगोँ मेँ 1000 वर्षखंड मेँ अंधविश्वास इतना फैला कि लोग धीरे धीरे जोराष्टर धर्म (संभवत: यह धर्म राक्षसोँ का होगा क्युँ कि पुराने लेखोँ मेँ राक्षस वेद के वारे मेँ वताया गया हे और जोराष्टर धर्म ग्रथों मेँ ज्यादातर भुत प्रेत और राक्षसी विद्याओँ का वर्नन हे ...आगे चलकर इस धर्म से इहुदी और इस्लाम धर्म बना और इहुदी धर्म से ईसाई धर्म ) को छोडकर नये धर्म बनाने लगे
। अंधविश्वास हि धर्म को मार देता हे और आज जोराष्टर धर्म लुप्त हो गया हे और इससे प्ररित 3 नये धर्म आ गये । असल मेँ सारे धर्मोँ मेँ तत्व एक हे परंतु अलग अलगा भाषा , प्रांत और अलगाववाद के वजह से हमेँ वो दिखनहीँ पाता ।
हिँदु धर्म मेँ विज्ञान का संगम
विना विज्ञान धर्म अंधा है और विना धर्म के विज्ञान लंगडा हे । कार्तिक मेँ मछली और मांस नहीँ खाते । क्युँ कि कार्तिक मेँ जीवोँ को वसंत रोग होता हे । फागुन मेँ होली खेला जाता हे पहले के जमानेँ मेँ प्राकृतिक रंगोँ से और होली खेलते थे और इन रंग के शरीर पर लगने पर चर्म खराब नहीँ होता था अपितु इस से मेँ औषधिय गुणो से चर्म को धुप से राहत मिलते थे । पहले के जमानोँ मे शिव जी को दुध चढ़ाकर चढ़ाकर लोग बाद मेँ उसे प्रसाद के रुप मेँ ग्रहण करते थे और आजकल वही दुध Total waste जाता हे । हिँदु धर्म मेँ विज्ञान भी हे अंधश्रद्धा भी । जरुरत हे अंधश्रद्धा को मिटाकर सिर्फ विज्ञान सम्मत कार्योँ को किया जो हमारे धर्म मेँ सालोँ से पाला जाता रहा हे । आज महाशिवरात्रि है और महाशिव रात्रि मेँ दीप जलाने तथा उपवास करने पर धार्मिक तौर पर तो फायदा होता हि साथ मेँ क्युँ कि यह कालरात्रि हे और इस दिन दुनिया शिवजी के त्रिशुल से जला था *(ग्रीक ग्रंथोँ मेँ मिलता जुलता प्रसंग आता हे कि ग्रीक युद्ध देवता नेँ दुनिया को अपने त्रिशुल से जला डाला था )* इसे पालन करना चाहिये इससे हम अपने पूर्वजोँ को याद भी कर लेते हे । विज्ञान कि मानेँ तो इसदिन चंद्र कि गुरुत्वाकर्षण सबसे कम होनेँ के वजह से खाना नहीँ खानेँ चाहिये वरना शरीर मेँ कई तरह के रोग हो सकते हे । इसलिये सभी दोस्तोँ से निवेदन हे वो महाशिव रात्रि जरुर करेँ हर तरह से यह प्रामाणिक हे । हिँदु धर्म को विज्ञान के सहारे देखिये वो महान और सर्व श्रेष्ठ लगेगा परतुं अगर बिना परखे जांचे आप किसी भी ढ़ोगीँ बाबा और तांत्रिक कि बातोँ मेँ आ जायेगेँ तो आपका भी क्षति धर्म का भी .....
बुधवार, 26 फ़रवरी 2014
पाकिस्तान और सच्चाई
जब पाकिस्तान वना अल्पसंख्यक कोँ कहा गया था उन्हे इस नये देश मेँ समान अधिकार और दर्जा मिलेगा । जनरल जिया उल हक के जमानेँ से कट्टरवादी ओँ कि समाज पर पकड़ बनती गयी । कट्टरवादी चाहते थे पाकिस्तान मेँ दुसरा कोई संप्रदाय ना रहे और वो इस मेँ लगभग सफल रहे । एक तरफ पाकिस्तान मेँ मारकाट और वलात्कार हो रहा था तो दुसरी तरफ पेशावर मेँ अल सेन्टस चर्च पर खड़ा होकर जिन्ना यह कह रहे थे कि पाकिस्तान ऐसा नहीँ करसकता । उन दिनोँ पाकिस्तान मेँ कट्टरवादीओँ के द्वारा यह समाचार फैलाया गया था कि पाकिस्तानी अल्पसंख्यकोँ पर तबतक हमला होगा जबतक अमेरिका हमला करना बंद न करेगा । ये लोग यह भी कह रहे थे कि हुकुमत ए पाकिस्तान के साथ तबतक सिज फायर न होगा जबतक पाकिस्तान मेँ कानुन व्यवस्ता मेँ अंत न लाया जाय और पाकिस्तान पर इस्लामी हुकुमत लागु न कि जाय । पाकिस्तान मेँ अल्पसंख्यकोँ के साथ जो कुछ हुआ वो सिर्फ संयोग न था इसे जान बुझकर और पुरे प्लानिँग के साथ किया गया था । ये वात सच हे कि साधारण पाकिस्तानी ऐसा नहीँ परंतु ये वात तो मानना हि पड़ेगा पाकिस्तानीओँ के द्वारा किया गया इन हत्या लुंठन और वलात्कार के कारण उन्हे आज दुनिया मेँ अपमान और जिल्लतभरी जिँदेगी जीना पडता हे । ये विषय पर वात करते समय पाकिस्तान सुप्रिमकोर्ट के भूतपूर्व अध्यक्ष आसमा जहांगीर नेँ कहा था "हमलोग अल्पसंख्यक कोँ हमारे दिल और उनके अधिकार से अलग कर दिआ हे । और अब हमेँ इसके लिये प्रयास करना होगा कि कैसे हम धर्म संप्रदाय नहीँ एक पाकिस्तानी के रुप मेँ एक हो पायेँ" ....( पाकिस्तानी रिपोर्टर जाहिदा हिना द्वारा लिखागया अंग्रेजी लेख का हिँदी भावानुवाद )
सोमवार, 24 फ़रवरी 2014
पार्टी नहीँ देश बड़ा हे ..,,
दिनभर किसी पार्टी के लिये प्रचार करने के वजाय अगर लोग फेसबुक मेँ हालचाल पुछ लेँ तो बेहतर हे । पता हे पिछले 1 साल से ऐसे पोस्ट पढ़ पढ़ कर उब गया हुँ । फेसबुक पर कुछ तो ऐसे है दिन भर उन्हे आप आप नमो नमो करते पाता हुँ । मोदी जी को भोट दो मगर उनके समर्थन के नाम पर उन्हे बदनाम क्युँ कर रहे हो ? कुछ दिन पहले एक नमो भक्त नेँ ओबामा को नरेँद्र मोदी जी के भाषण देखरहे हो ऐसा तसवीर अपलोड़ किया गया था । जबकि यह तसवीर नकली थी । एक भाई नेँ तो अमिताभ बच्चन का एक फोटो अपलोड़ करते हुए यह प्रचार करने कि कोशिश कि वो मोदी समर्थक हे और BJP के साथ हे । मेरा कहने का तात्पर्य यह है कि क्युँ मोदी जी का गलत प्रचार कर रहे हो ? सोश्याल मिडिया को सिर्फ पार्टी प्रचार माध्यम समझने वालेँ को अछा पोस्ट अछे नहीँ लगते क्युँ कि उन्हे सिर्फ अपने तथा अपने पार्टी कि प्रशंसा और जय जय कार सुनना हे । जबकि यहाँ कोई भी पार्टी मेँ 100% अछे नेता नहीँ है । असल मेँ पार्टी कोई भी हो इस देश मेँ 544 चोर कल भी थे आज भी हे और हमेशा रहेगेँ । कुछलोग युवाओँ को यह सपना दिखा रहे है कि मोदी जी के पीएम बनने पर यह हो जायेगा बो हो जायेगा लेकिन उन्हे पता हे कि यह इतना आसान नहीँ । क्या मोदी पाक चीन और अमरिका से लढ़ पायेगे ? क्या मोदी हिँदु धर्म को गलत चित्रण करनेवाले विधर्मीओँ को दंड़ित कर पायेगेँ ? क्या मोदी कंग्रेस को मिटा पायेगेँ ? शायद ऐसा हो लेकिन इसके लिये हमसब को भी लढ़ना होगा सिर्फ नमो नमो करने से कुछ न होगा । देश मेँ बेकार घुम रहे नौजवान अगर कोई भी धंधा या खेती करने मेँ ध्यान देँ तो ज्यादा अछा रहेगा । इन पार्टीओँ से हमेँ आजतक देखने के लिये सिर्फ सपनेँ मिलते आये हेँ । ये लोग कभी भी 100% काम नहीँ करते लेकिन प्रचार 101% करते है । मोदी भी चाहते हे कि कोई वेरोजगार न रहे परंतु उन्होने कभी यह न कहा कि मेरा तुम अपप्रचार करो । अंत मेँ इतना कहुँगा देश को एहमियद दो अपने कर्म करो और किसी भी पार्टी कि तरफदारी करना छोड़ दो क्युँ कि पार्टी से बड़ा देश होता है और देश से बढ़कर कोई नहीँ मोदी भी नहीँ !!
गुरुवार, 20 फ़रवरी 2014
अलीवावा और 544 चोर
आजकल के नेताओँ मेँ कोई शरम लिहाज तो वचा नहीँ हे । संसदभवन को अखाड़ा और नाटक मंच समझनेवाले नेताओँ को आखीर कौन समझाये ? यहाँ तो खुद आम इंसान सच्चाई का सामना करने से ड़रता हे । अन्ना केजरी जगमोहन ममता मोदी राहुल आपस मेँ लढ़ते रहते है क्युँ कि समाज उनको बढ़ावा दे रहा हे । दुर्वल मानसीकता के लोग खुद पिछे रहते तबतक जबतक उन्हे कोई नायक नहीँ मिलजाता ! इन लोगोँ को किसी के उपर तो गुस्सा निकालना ही है बस अलग अलग पार्टि बनालेते और एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप और किचड़ उछालते रहते । इन चोरोँ के सरदारोँ को कोई नहीँ समझाता कि यह उनका बाप का माल नहीँ जो बो फिजुल खर्च करते हे । समाज के अस्थायी नौकर खुदको अगर राजा महाराजा समझनेलगे तो हो गया रावणराज ! कभी धुप न पड़नेवाले एसी रुम मेँ बैठकर इस गरीब देश को चलानेवालोँ को क्षेत मेँ काम कर रहे गरीब किसान की मजबुरी का क्या ग्यान होगा । चाय बेचनेवाला टैकसी चलानेवाला और किसान जिस दिन भारत का प्रधानमंत्री बनेगेँ तब शायद कुछ बदलाव आये । 544 चोरोँ के पीछे आजकल चुनावी भुत लगा हे इसलिये ये लोग एक दुसरे को निचा दिखाने मेँ लग गये है । और इनके चमचे .....आजकल चमचोँ का इज्जत ज्यादा हे । जितना प्रचार करोगे उतने मिठाई खाओगे । हाय रे .....ये गुलामी का दौर कब खत्म होगा ?
शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014
आज हे भालेंटाइन डे !
ओहो ! सारा दुनिया प्यार जता रहा हे । वाह वाह गोरी गोरी छोरियाँ ,,, और ये प्रमी जोडियाँ । ओ हो हो ! ! ! ! इस प्यार कि तो मेँ ? अरे भाई आप क्युँ परेशान होते हो ? ये तो जी बस कुछ ही घंटो का तामझाम हे । दिन गुजरते ही प्यार और प्यार करनेवाले अपने अपने रस्थे हो लेगेँ जी हाँ कुछ घंटोँ का प्यार फिर क्या ? कभी मिलगये तो हाय हैलो । पिँकी रिंकी चिँकी को पता हे मोहन रामु गणेश उनके गोरी चहरा के लिये पिछे पड़े है वरना पगलाये हुए कुत्ते के तरह उनके आगेपिछे ना होते । गांव कि वात अलग है । गांव मेँ आज भी ये valentine का भुत लगानहीँ । लेकिन सहरोँ मेँ 14 फरबरी को लोग प्यार के मोदक पिये हुए रहते हे । 14 फरबरी यानि प्यार करने का दिन भोग ले मज्जा लुट ले बेटा कल कि किसे फिकर ? दिनभर झुमोँ रातभर झुमोँ खुद के पकेट मेँ नोट ना हे बाप के पैसोँ से झुमोँ । एक बंदा ने पुछ हि लिया मेरा बाप का नोट है तुझे क्युँ मिर्ची लगी ? एक अमीर लड़का 10 Valentine कार्ड खरिदता हे 1000.00 रुपया मेँ पर अंधी बुढ़ी मा के लिये 1 रुपया भी नहीँ । वाह रे मियाँ 1 नहीँ 10 10 ! लगे रहो हम कौन होते है कहनेवाले ? ये xmas valentine day मनानेवालोँ के लिये हीँ बुजुर्ग कह गये "अंग्रेज चले गये इन्हे छोड़गये " . भैया 5 दिन से सुरत सहर भी बदला हुआ लगरहा है और ये बदलाव अमीरजादोँ कि दैन हे । रोज सुबह सुबह रास्तोँ मेँ गुलाब के फुल,कार्ड और बलुन दिख जाते । जो भी हो इन पागलोँ के बजह से हमरा यानी कल्लु भैया का दिन तो अछा गुजरा । हम तो कहते हे 365 दिन Valentine बनाओ हम भी खुश तुम भी खुश ।
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