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शनिवार, 10 मई 2025

ज़्यूस की जन्म कथा और भारतीय पौराणिक कथाओं के साथ समानताएँ

प्राचीन काल में, जब संसार एक नए रूप में ढल रहा था, उस समय यूरानोस, आकाश के प्रथम देवता, जिनका नीला आवरण समस्त पृथ्वी को ढके हुए था। उनकी संगिनी थीं गैया, पृथ्वी की माता, जो जीवन का स्रोत और समस्त सृष्टि की जननी थीं। इस दैवी दंपति के मिलन से बारह शक्तिशाली टाइटन का जन्म हुआ, जो देवताओं के पूर्वज थे। इनमें थीं रिया, एक सौम्य और सुंदर देवी, जिनका हृदय मातृत्व की उष्णता और प्रकृति की समृद्धि से परिपूर्ण था।

कई युगों बाद रिया और क्रोनोस का विवाह हुआ। क्रोनोस टाइटनों में सबसे शक्तिशाली और महत्वाकांक्षी थे। क्रोनोस ने अपने पिता यूरानोस को एक क्रूर योजना के तहत सिंहासन से हटा दिया। गैया की सहायता से क्रोनोस ने एक हथियार लेकर यूरानोस को घायल किया और समस्त देवताओं के राजा बन गए। लेकिन यूरानोस का शाप और गैया की भविष्यवाणी ने क्रोनोस के मन को अंधकारमय कर दिया। गैया ने शाप दिया, “जैसे तुमने अपने पिता को सिंहासन से हटाया, वैसे ही तुम्हारा अपना संतान भी तुम्हें सिंहासन से हटा देगा।” इस भय ने क्रोनोस के मन को विषाक्त कर दिया।

रिया और क्रोनोस के छह संतानें हुईं। सबसे पहले देवी हेस्टिया का जन्म हुआ। इसके बाद देवी डेमेटर, फिर देवी हेरा, पाताल के देव हेड्स और समुद्र के देव पोसाइडन का जन्म हुआ। लेकिन क्रोनोस के मन में व्याप्त भय ने उन्हें एक अमानवीय पथ पर ले गया। प्रत्येक संतान के जन्म के साथ ही वह उन्हें निगल लेता था। रिया का हृदय दुख से टूट रहा था। उनके गर्भ से जन्मे प्रत्येक शिशु उनके पति के उदर में विलीन हो रहा था।

अंत में ज़्यूस का जन्म हुआ, जिनकी आँखों में बिजली और वज्र की चमक दिखाई देती थी। जब ज़्यूस का जन्म हुआ, रिया के मन में एक नया संकल्प जागा। उन्होंने निर्णय लिया कि इस शिशु को वह किसी भी तरह बचाएंगी। रिया ने इस समस्या का समाधान पाने के लिए गैया के पास गईं। गैया ने उन्हें बताया कि शिशु को कैसे बचाया जाए।

रिया ने एक पत्थर लिया और उसे नरम कंबल में लपेटकर शिशु की तरह सजाया। क्रोनोस के सामने उन्होंने इस ‘शिशु’ को दिखाया। भय और असावधानी में क्रोनोस ने उस पत्थर को निगल लिया और मन ही मन निश्चिंत हो गए कि उनकी शक्ति अब सुरक्षित है।

इस दौरान रिया गुप्त रूप से ज़्यूस को लेकर क्रेट द्वीप पर चली गईं। क्रेट के लोग रिया की भक्ति से पूजा करते थे, इसलिए उन्होंने उनकी सहायता के लिए हर संभव प्रयास किया। क्रेट के घने जंगलों और गुफाओं से भरे पर्वतों में ज़्यूस को छिपाकर रखा गया। रिया ने अपने शिशु को अमल्थिया नामक एक दैवी बकरी (निम्फ) के हवाले किया, जिसने ज़्यूस को दूध और शहद खिलाकर पाला। ज़्यूस के रोने की आवाज़ को क्रोनोस से छिपाने के लिए कोरिबेंट्स योद्धा-नर्तक दल ने ढोल बजाकर और नाचकर चारों ओर एक शोर का परदा बनाया, जिससे क्रोनोस को कुछ पता नहीं चला।

क्रेट की गुफाओं में रहकर और बढ़कर ज़्यूस एक शक्तिशाली युवक बन गए। उनके शरीर में वज्र की शक्ति प्रतिबिंबित हो रही थी। गैया और रिया ने उन्हें अपने भाई-बहनों को मुक्त करने और क्रोनोस के अत्याचार से संसार को मुक्त करने का दायित्व सौंपा। युवा ज़्यूस ने एक योजना बनाई। उन्होंने एक बुद्धिमती टाइटन देवी मेटिस की सहायता ली। मेटिस ने छल से क्रोनोस को एक औषधि मिश्रित पेय दिया, जिससे उन्हें उल्टी हो गई। इस उल्टी में क्रोनोस द्वारा निगले गए उनके सभी संतान—हेस्टिया, डेमेटर, हेरा, हेड्स और पोसाइडन—मुक्त हो गए। उन्होंने ज़्यूस के साथ मिलकर अपने पिता क्रोनोस के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।


यह युद्ध “टाइटनोमाची” के नाम से प्रसिद्ध हुआ और दस वर्षों तक चला। ज़्यूस और उनके भाई-बहनों ने ओलंपस पर्वत को अपना मुख्यालय बनाया और वहाँ से टाइटनों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। गैया ने ज़्यूस को साइक्लोप्स और हेकाटोंकाइर्स नामक दैत्यों के साथ मिलने की सलाह दी। यूरानोस द्वारा ये बंदी बनाए गए थे, लेकिन ज़्यूस ने इन्हें मुक्त किया और कृतज्ञता स्वरूप साइक्लोप्स ने ज़्यूस को वज्र, पोसाइडन को त्रिशूल और हेड्स को अदृश्य मुकुट उपहार में दिया।

इन हथियारों और मित्रों की सहायता से ज़्यूस और उनके दल ने टाइटनों को परास्त किया। क्रोनोस और अन्य टाइटनों को पाताल के एक गहरे अंधेरे स्थान टारटारस में बंदी बनाकर रखा गया। ज़्यूस देवताओं के राजा बने, और उनके भाई-बहनों ने संसार के विभिन्न हिस्सों का शासन संभाला। हेड्स ने पाताल जगत, पोसाइडन ने समुद्र और ज़्यूस ने आकाश का शासक बनाया। डेमेटर ने पृथ्वी की समृद्धि की रक्षा की, हेस्टिया गृह शांति की प्रतीक बनीं और हेरा ने जीवों के वैवाहिक जीवन को नियंत्रित किया।

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ईसापूर्व 8वीं शताब्दी में रचित हेसिओड की “थियोगोनी” (Theogony) में देवताओं की उत्पत्ति और वंशावली का विस्तृत वर्णन है। इस ग्रंथ में सबसे पहले ज़्यूस के जन्म और क्रोनोस के खिलाफ उनकी विजय की कथा वर्णित है।

ज़्यूस की जन्म कथा को पढ़ने या सुनने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि यह श्रीकृष्ण की जन्म कथा के साथ कितनी समानता रखती है।

जैसे क्रोनोस ने अपने पिता यूरानोस को गद्दी से हटाया था, वैसे ही कंस ने अपने पिता उग्रसेन को गद्दी से हटाया था। यूरानोस ने क्रोनोस को शाप दिया था कि उनकी मृत्यु का कारण उनका अपना पुत्र होगा। कंस के लिए आकाशवाणी हुई थी कि देवकी का आठवाँ पुत्र उसके निधन का कारण बनेगा। क्रोनोस अपनी संतानों को जन्म होते ही निगल लेता था, कंस अपनी बहन के शिशुओं को जन्म होते ही मार देता था। ज़्यूस अपनी माता के छठे संतान थे, श्रीकृष्ण आठवें संतान थे। रिया ने गैया के परामर्श पर ज़्यूस को क्रेट द्वीप ले जाकर छिपाया था। वसुदेव ने श्रीकृष्ण को गोपपुर ले जाकर अपने मित्र नंद के घर छोड़ दिया था। रिया ने क्रोनोस को एक शिशु के आकार का पत्थर देकर ठगा था। वसुदेव ने श्रीकृष्ण को नंद-यशोदा के घर छोड़कर, यशोदा के घर जन्मी शिशु कन्या (मायादेवी) को कंस को दे दिया था, जिसे मारने की कोशिश करने पर मायादेवी प्रकट होकर कंस को ताड़ना दी थी। बड़ा होने पर ज़्यूस ने क्रोनोस को परास्त करने की कोशिश की, वैसे ही श्रीकृष्ण ने बड़ा होने पर गोप से मथुरा जाकर कंस से शासन छीन लिया और उग्रसेन को पुनः शासक बनाया।

तुलनात्मक पौराणिक विद्वान यह मानते हैं कि ज़्यूस और क्रोनोस के युद्ध की कथा में इंद्र और वृत्रासुर के युद्ध की कथा के साथ समानता है।

रोमन पौराणिक कथाओं में रोमन देवता जुपिटर ज़्यूस के समकक्ष हैं और उनकी जन्म और उत्थान की कथा ज़्यूस की जन्म कथा के साथ लगभग समान है। जुपिटर को भी उनके पिता सैटर्न (क्रोनोस का रोमन संस्करण) से छिपाकर रखा गया था और बाद में उन्होंने सैटर्न को परास्त कर देवताओं के राजा बने। यह ग्रीक और रोमन संस्कृतियों के सांस्कृतिक संबंध को दर्शाता है।

नॉर्स पौराणिक कथाओं में ओडिन के उत्थान में भी पितृपुरुषों के खिलाफ संघर्ष देखा जाता है। ओडिन और उनके भाइयों (विली और वे) ने अपने पूर्वज दैत्य यमीर को मारकर उनके मृत शरीर पर विश्व की सृष्टि की। यह कथा भारतीय पौराणिक कथा में मधु और कैटभ के मेद से मेदिनी या पृथ्वी की उत्पत्ति की कथा के साथ समानता रखती है।

ज़्यूस की गाथा में क्रोनोस की कथा के साथ कुछ समानताएँ हैं। मेसोपोटामिया की मरduk और तियामत के युद्ध की गाथा में भी इसके साथ कुछ समानताएँ हैं।

लेकिन मिस्र की संस्कृति ग्रीक और मेसोपोटामिया से अधिक प्राचीन थी। मिस्र की सभ्यता लगभग 3500 से 3100 ईसा पूर्व में विकसित हुई थी। इसलिए मिस्र की गाथाओं में गहराई से देखने पर हमें और अधिक जानकारी मिल सकती है। मिस्र की पौराणिक कथाओं में आकाश के देव होरस की गाथा में भी ज़्यूस की जन्म गाथा के साथ कुछ समानता है। होरस के पिता ओसिरिस, मिस्र के पूज्य राजा थे और उनकी क्रूर हत्या कर दी गई थी।


मिस्र की पौराणिक कथा के अनुसार, सेट होरस के मामा थे। सेट अशांति और मरुभूमि के देवता थे, जिन्होंने मिस्र के सिंहासन पर कब्जा कर अंधकारमय शासन शुरू किया। होरस, अपनी माता आइसिस की सुरक्षा में बड़े हुए और अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने की प्रतिज्ञा की। लंबे और भयंकर युद्ध में उन्होंने सेट के खिलाफ लड़ाई लड़ी। कई परीक्षाओं और युद्धों के बाद, होरस ने सेट को परास्त कर मिस्र का सिंहासन प्राप्त किया।

मिस्र की गाथा में होरस ने अपने मामा सेट के खिलाफ युद्ध किया। ठीक वैसे ही श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस के खिलाफ लड़ाई लड़ी। चूंकि मिस्र की संस्कृति अधिक प्राचीन है, इसलिए संभव है कि होरस की कथा बाद में ग्रीस में जाकर एक नए रूप में ढली हो। प्राचीन भारतीयों का व्यापारिक संबंध मिस्र और मेसोपोटामिया के साथ 5000 वर्षों से था। श्रीकृष्ण का समयकाल ख्रीस्तपूर्व 3500 माना जाता है। इस समय तक मिस्र और मेसोपोटामिया की संस्कृतियाँ विकसित हो चुकी थीं। इसलिए अनुमान लगाया जा सकता है कि श्रीकृष्ण की जन्म कथा भारतीय व्यापारियों के माध्यम से मिस्र और मेसोपोटामिया में फैली हो, जो बाद में स्थानीय लोककथाओं में विभिन्न रूपों में ढली। हो सकता है कि ग्रीक लोग ख्रीस्तपूर्व नौवीं शताब्दी में मेसोपोटामिया या मिस्र में भारतीय व्यापारियों के संपर्क में आए हों और उन्होंने श्रीकृष्ण की जन्म गाथा सुनी हो, जो बाद में ग्रीस में ज़्यूस की जन्म गाथा के रूप में स्वीकार की गई। यह संभव हो सकता है या नहीं भी, लेकिन इन पौराणिक गाथाओं में समानता निश्चित रूप से है, जो हमारा ध्यान इस ओर आकर्षित करती है।

शुक्रवार, 2 मई 2025

घोड़े का अंडा

हरिहर एक बहुत ही सीधा-सादा और भोला व्यक्ति था। एक दिन वह पास के गाँव में होने वाले अस्थाई सब्जी बाजार में सब्जियाँ खरीदने गया। उस समय नई-नई भारत में अमेरिका से कुमड़ा (Cucurbita maxima) आया था। उस समय गाँव के लोग पेठख ( Benincasa hispida) को ही कर्कारु कहते थे । 

अब चूँकि कुमड़ा नया था तो लोग इसे ज्यादा खरीदते नहीं थे। कई लोगों से बेचने की कोशिश करने के बाद कुमड़े का व्यापारी निराश हो चुका था। तभी उसने हरिहर को उधर से गुजरते देखा और उसे पास बुलाया। हरिहर से कुछ देर बात करने के बाद व्यापारी समझ गया कि यह व्यक्ति बहुत सीधा और भोला है। इसलिए उसने उसे एक कुमड़ा देते हुए कहा, "देखो, यह घोड़े का अंडा है। इसे खाने से शरीर में बहुत ताकत आती है।"

हरिहर भोला था, लेकिन वह व्यापारी की बात पर इतनी आसानी से विश्वास नहीं कर पा रहा था। व्यापारी ने उसका मनोभाव समझ लिया और फिर कहा, "यह अंडा साधारण घोड़े का नहीं, पक्षीराज घोड़े का अंडा है। पक्षीराज घोड़ा आकाश में उड़ता है और बहुत तेज दौड़ता है।" हरिहर का सीधा था इसलिए उसके बातों में आ गया। वह सब्जियाँ खरीदना भूलकर उस कुमड़े को पक्षीराज घोड़े का अंडा समझकर सब्जी बाजार से खरीद लाया और घर की ओर चल पड़ा।

इधर जंगल में राजा के लोग शेर का शिकार कर रहे थे। आज केवल गुजरात के गिर अभयारण्य में ही 600 से 1000 के बीच शेर बचे हैं, लेकिन सिर्फ 500 साल पहले पूरे भारत में शेर हर जगह पाए जाते थे। राजा के लोगों के शिकार से डरकर एक शेर झाड़ी में छिपा हुआ था। पाँच दिन से शिकारी उस शेर को मारने की कोशिश में थे, लेकिन शेर अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिप रहा था। बेचारा शेर अपनी जिंदगी की सारी उम्मीद छोड़ चुका था, फिर भी वह छिपता रहा।


वहां सांज का वक्त था । हरिहर उसी रास्ते से घोड़े के अंडे के रूप में कुमड़ा लिए खुशी-खुशी घर जा रहा था कि अचानक ठोकर लगने से उसके हाथ से कुमड़ा छिटककर उस झाड़ी में जा गिरा, जहाँ शेर छिपा था।

शेर तो शिकारियों के डर से झाड़ी में छिपा था। जैसे ही कुमड़ा उस झाड़ी में गिरा, वह बरगद के पत्ते की तरह काँपने लगा।


हरिहर ने झाड़ी में घोड़े का अंडा ढूँढते-ढूँढते वहाँ छिपे शेर की गर्दन पकड़ ली। हरिहर ने सोचा कि शायद पक्षीराज घोड़े का अंडा नीचे गिरकर फट गया होगा और पक्षीराज घोड़ा उसमें से निकल आया होगा। संध्या के समय झाड़ी वाली जगह पर कुछ ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था। इधर शिकारियों के डर से शेर का तो पहले ही पीलिया हो चुका था। जैसे ही हरिहर ने उसे जोर से पकड़ा, वह बुरी तरह से डरगया और आँखें मूँदकर वह जान बचाने के लिए दौड़ पड़ा। हरिहर भी किसी तरह शेर की पीठ पर बैठ गया।


दौड़ते-दौड़ते शेर ने कई रास्ते पार कर लिए। हरिहर का गाँव-गली पीछे छूट गया, लेकिन उसे कुछ पता नहीं चला। हरिहर शेर की पीठ पर बैठकर सोच रहा था कि वह पक्षीराज घोड़े पर बैठकर आकाश में उड़ रहा है।

जंगल के रास्ते में शेर दौड़ रहा था, इसलिए हरिहर को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन जैसे ही शेर जंगल छोड़कर खुले मैदान में दौड़ने लगा, उसे देखकर हरिहर का हलक सूख गया। शेर दौड़ रहा था और हरिहर किसी तरह एक डार पकड़कर अपनी जान बचा पाया।

बुधवार, 30 अप्रैल 2025

लिटिलहैम्पटन के रहस्यमय पत्र

इंग्लैंड के दक्षिणी तट पर बसा एक छोटा सा गांव, लिटिलहैम्पटन, जहां 1920 में एक सच्ची घटना घटी। समुद्र तट पर स्थित इस गांव में जीवन शांत और साधारण था। लेकिन यह शांति 1920 में टूट गई। एक रहस्यमय घटना ने गांव को हिलाकर रख दिया, जिसे बाद में "लिटिलहैम्पटन लेटर्स" या "लिटिलहैम्पटन लिबल्स" के नाम से जाना गया।

इस कहानी की मुख्य पात्र थीं गांव की एक सम्मानित महिला, एडिथ स्वान। एडिथ स्थानीय समाज में एक धार्मिक, शांत और आदर्श महिला के रूप में जानी जाती थीं। उनका जीवन पूरी तरह नियमबद्ध और समयनिष्ठ था। चर्च जाना, परिवार की देखभाल करना और गांव के सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेना उन्हें पसंद था। लेकिन एक दिन कुछ अप्रत्याशित हुआ। एडिथ के पास एक अनजान पत्र आया। पत्र खोलते ही एडिथ का चेहरा शर्म से लाल हो गया। पत्र में अश्लील और अपमानजनक भाषा थी, जो उनके चरित्र को बदनाम कर रही थी।

पहले तो एडिथ ने इसे गलती समझा। लेकिन एक दिन, दो दिन, तीन दिन... ऐसे कई पत्र आते रहे। न केवल एडिथ, बल्कि गांव के कुछ अन्य लोग भी ऐसे पत्र पाने लगे। पत्रों की भाषा इतनी अभद्र थी कि गांव वालों में डर और असंतोष फैल गया। ये पत्र कौन लिख रहा है? ऐसा क्यों कर रहा है? हर किसी के मन में सवाल उठ रहे थे।

एडिथ स्वान इन पत्रों से इतनी परेशान हुईं कि उन्होंने पुलिस की शरण ली। उन्होंने सीधे अपनी पड़ोसी रोज़ गुडिंग के खिलाफ शिकायत दर्ज की। रोज़ गुडिंग एडिथ के ठीक विपरीत थीं। वह एक आज़ाद ख्याल, स्वतंत्र सोच वाली महिला थीं। उनकी जीवनशैली गांव के रूढ़िवादी समाज के लिए असामान्य थी। रोज़ गुडिंग विवाहेतर संबंध में रहती थीं और उनकी एक बेटी थी। वह गांव के रीति-रिवाजों को खुलेआम नज़रअंदाज़ करती थीं, जिससे कई लोग नाराज़ रहते थे।

एडिथ ने दावा किया कि रोज़ के साथ उनका पहले कुछ विवाद हुआ था, इसलिए ये पत्र रोज़ का बदला लेने का तरीका हैं। गांव वालों में भी रोज़ के चरित्र को लेकर गपशप थी, जिसने एडिथ की शिकायत को और मज़बूत किया। पुलिस ने जांच शुरू की और रोज़ को गिरफ्तार कर लिया।

रोज़ के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा चला। एडिथ की गवाही और गांव की रूढ़िवादी मानसिकता रोज़ के खिलाफ गई। पत्रों में मौजूद हस्तलेख और भाषा को लेकर कुछ संदेह था, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं था कि रोज़ निर्दोष हैं। दूसरी ओर, एडिथ का सम्मानित चरित्र उन्हें संदेह से ऊपर रखता था। अदालत ने रोज़ को दोषी ठहराया और उन्हें जेल की सजा सुनाई।

जेल में होने के बावजूद रोज़ अपनी निर्दोषता पर अड़ी रहीं। उन्होंने कहा, "मैंने ऐसा नीच काम नहीं किया। जो यह कर रहा है, उसे ढूंढ निकालिए।" लेकिन उनकी बात को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया।

हैरानी की बात यह थी कि रोज़ के जेल में होने के बाद भी अश्लील पत्र आना बंद नहीं हुआ। एडिथ और अन्य लोग अब भी ऐसे पत्र पा रहे थे। इस नई घटना ने पुलिस और गांव वालों के मन में संदेह पैदा किया। अगर रोज़ जेल में हैं, तो ये पत्र कौन लिख रहा है? इस नई स्थिति ने पुलिस को मामले की दोबारा जांच करने के लिए मजबूर किया।

पुलिस ने इस बार और गंभीरता से गहरी जांच शुरू की। पत्रों की हस्तलेख, भाषा और पत्र भेजने की प्रक्रिया को बारीकी से जांचा गया। लंबी जांच के बाद एक चौंकाने वाला सच सामने आया। सबूत मिले कि ये अश्लील पत्र खुद एडिथ स्वान ही लिख रही थीं। उन्होंने खुद को और दूसरों को पत्र लिखे और रोज़ को फंसाने के लिए साज़िश रची।

एडिथ के इस कृत्य का कारण स्पष्ट नहीं था। कुछ लोगों का मानना था कि एडिथ और रोज़ के बीच पुराना विवाद था, इसलिए एडिथ ने रोज़ को सामाजिक रूप से अपमानित करना चाहा। कुछ ने एडिथ की मानसिक स्थिति को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया। जो भी हो, इस खुलासे ने गांव वालों को स्तब्ध कर दिया। जिस एडिथ को सभी "नीतिवान" महिला मानते थे, वह इतने नीच काम में शामिल थीं, यह कई लोग आसानी से विश्वास नहीं कर पाए।

एडिथ का अपराध साबित होने के बाद, रोज़ गुडिंग को जेल से रिहा कर दिया गया। उनके नाम से लगा कलंक हटा, लेकिन इस घटना ने उनके जीवन पर गहरा आघात छोड़ा। एडिथ स्वान के खिलाफ मुकदमा चला, और उन्हें कानून के अनुसार सजा दी गई। यह घटना लिटिलहैम्पटन में एक बड़े कांड के रूप में कुख्यात हुई, जिसकी चर्चा राष्ट्रीय मीडिया में भी हुई।

लिटिलहैम्पटन के इन रहस्यमय पत्रों ने शांत गांव में तूफान ला दिया था। यह घटना सामाजिक पूर्वाग्रहों और चरित्र को लेकर गलत धारणाओं के खतरों को उजागर करती है। रोज़ गुडिंग निर्दोष थीं, लेकिन उनकी जीवनशैली ने उन्हें आसानी से अपराधी के रूप में चित्रित कर दिया। दूसरी ओर, एडिथ का बाहरी सम्मान उनके अपराध को छिपाए रखा। इस घटना ने लिटिलहैम्पटन के निवासियों को सबक दिया कि सत्य जानने से पहले किसी को दोषी ठहराना कितना गलत हो सकता है।

इस ऐतिहासिक घटना पर आधारित 2023 में *Wicked Little Letters* नाम से एक फिल्म रिलीज़ हुई। इस फिल्म में हास्य के साथ एडिथ स्वान और रोज़ गुडिंग के चरित्रों को दर्शाया गया है।